India's Dying Mother - The Ganga

 
The Ganga

भारत नदियों का देश  है, और भारत में गंगा नदी नहीं माँ है। गंगा भारत के 5 राज्यों ( Uttarakhand, Utter Pradesh, Bihar, Jharkhand और West Bengal) से होकर गुजरती है। भारत की बहुत बड़ी आबादी गंगा पर  आश्रित है और इनकी पूजा की जाती है। पर विडंबना ये है कि जिस गंगा को माँ कहा जाता है उसका अस्तित्व  आज खतरे में है। जिस तरह माँ अपने बच्चों को जीवन देती है, ऊँची शिक्षा देती है और बुलन्दी तक पहुँचाती है, ठीक वैसे ही न जाने कितने बेटों ने माँ गंगा के नाम पर बुलन्दी हासिल कर ली, लेकिन बेचारी माँ आज भी अपने आस्तित्व के लिए लड़ रही है और बेटों को माँ की सुध भी नहीं है। 


गंगा के प्रदूषित होने का सबसे बड़ा कारण शहरों के नाले का गंदा पानी है। जो बिना साफ किये सीधे गंगा में आकर मिल जाता है। Central Pollution Control Board (CPCB) of India के अनुसार, 2723 million liter a day (MLD) गन्दा पानी रोजाना गंगा में आकर मिलता है। जो कि गंगा के प्रदूषित होने का 85% कारण है। ये गन्दा पानी गंगा किनारे बसे हुए 50 शहरों से आता है, या यूँ कह सकते है की गंगा ने जिन्हे बसाया वही इसे नष्ट करने पर तुले हैं। 

विश्व के अन्य प्रगतिशील देशों में  Wastewater Treatment Plant होता है जो गंदे पानी को साफ करता है, फिर ये साफ पानी खेती के लिए इस्तेमाल होता है या साफ पानी नदियों में जाकर मिल जाते हैं। जिससे नदी प्रदूषित नहीं होती है। 

WHO के अनुमत सीमा से 3000% से भी अधिक गंगा प्रदूषित है। ये बहुत लज्ज़ा और दुःख की बात है की  जिस गंगा को माँ कहा जाता है, जिसकी पूजा की जाती है, जिस में नहाने मात्र से सारे पाप धूल जाते है, उस गंगा को The Most Polluted Rivers In India का खिताब दिया गया है।



गंगा के प्रदूषित होने का दूसरा सबसे बड़ा कारण डैम या बाँध हैं। डैम या बाँध गंगा के प्रवाह में बाधा डालते हैं और इसकी गति को धीमा कर देते हैं। इसके कारण गंगा की Self Purification Capacity समाप्त हो जाती है। डैम या बाँध की सफाई नहीं होने के कारण गर्द नदी के तल में बैठ जाती और वो भी गंगा को प्रदूषित करती है।  इसी गर्द के कारण वर्षा ऋतु में बाढ़ भी आती है जो तबाही लाती है ।



गंगा के प्रदूषित होने का दूसरा सबसे बड़ा कारण Hard Wastage Material है।  सैकड़ों टन कचरा जैसे प्लास्टिक का बोतल, पॉलीथिन, पूजा की बची हुई सामग्री गंगा में फेंक दिए जाते हैं। जो ना गलते है ना सड़ते हैं, और गंगा के प्रवाह में बाधा डालते है और गंगा को प्रदूषित करते हैं। 

Environmental Biology Laboratory, Department of Zoology, Patna University के अध्ययन के अनुसार गंगा में Mercury पाया गया है। यद्धपि Mercury की मात्रा खतरनाक स्तर तक नहीं पहुँच पाया है किन्तु Mercury की उपस्थिति ही चिंताजनक है।

Uttarakhand Environment Conservation and Pollution Control Board, द्वारा किये गए अध्ययनों के अनुसार हरिद्वार के पास गंगा जल में Coliform Bacteria पाया गया है, जिसका स्तर 5500 है। जो अनुमानित सीमा से 100 गुना अधिक है। 


हम हर समस्या का ठिकरा सरकार पर फोड़ देते हैं और खुद कुछ नहीं करना चाहते हैं। सरकार बदलती रहती है और Old Wine In A New Bottle वाला काम करती है। वो केवल प्रोजेक्ट का नाम, स्कीम का नाम बदल देती है, अधिकारिओं की अदला-बदली करती है और अपना पल्ला झाड़ लेती है, होता कुछ भी नहीं है। सबसे बड़ी चीज है जागरूकता, जब तक हमलोग किसी समस्या को समझेंगे नहीं तो उसका महत्व और उसका समाधान कभी नहीं निकाल पायेंगे। प्लास्टिक के दुष्प्रभाव को समझाना होगा और प्लास्टिक के बोतल, पैकेट आदि को बैन करना होगा। घाट और पूजा अस्थली पर जगह जगह कूड़ेदान लगाना और लोगों को उसके इस्तेमाल के लिए प्रोत्साहित करना होगा। कहीं कहीं कड़ाई करते हुए जुर्माना भी लगाना होगा। गंगा मैली नहीं है, हम उसे प्रदूषित कर रहे हैं। सारे Industrial Gutter बंद करने होंगे। Wastewater Treatment Plant लगाने होंगे, प्रदूषित पानी को गंगा में जाने से पहले उसे साफ़ करना होगा। तभी हम गर्व से कह पायेंगे ये है "माँ गंगा"।



आस्था के साथ गंगा को अपना समझना होगा, उससे प्यार करना चाहिये ।











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